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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
हिंदी कहानी में पुरुष विमर्श : एक परिचय
Authors
आतिश कुमार विश्वकर्मा
Abstract
जैसा की विदित है कि कहानियां ज्यादातर पुरुष पात्र को केंद्र में रखकर ही लिखी जाती है। उसमें निहित पुरुष का व्यक्तित्व अच्छा–बुरा दोनों होता है। ज्यादातर देख सकते हैं कि पुरुष पात्र शोषण करने वाला ही चित्रित होता है। और यह कहीं-न-कहीं समाज में चल रहे गतिविधियों की ही देन है। इसे झुठलाना संगीन होगा। माना कि इस पुरुष प्रधान और पितृसत्तात्मक समाज में पत्नी के रूप में स्त्री प्रताड़ित हुई है, पर मैं मानता हूं कि हमेशा पति ही गलत नहीं होता। गलत पत्नी भी हो सकती है। पुरुष जितनी भी भूमिका निभाता है और जिसमें वह प्रताड़ित होता है, समाज में कहीं न कहीं वह पक्ष छिप जाता है। हालांकि साहित्य और समाज का परस्पर संबंध है, परंतु जब अन्य विमर्शों पर खुल कर बातें होती है तब वहां पुरुष विमर्श उपेक्षित रहता है। इसका कारण यह भी है कि विविध विमर्शों को लेकर बुनियादी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। हिंदी में तो प्रामाणिक दस्तावेज तो अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं आया है। हिंदी की कुछ ऐसी कहानियां हैं जैसे– श्याम सखा श्याम की ‘कत्ल’, शैलेंद्र नाथ कौल की ‘निमंत्रण’, सुदर्शन प्रियदर्शिनी की ‘आचार– संहिता’ विजय उपाध्याय की ‘फैसला’ आदि, जिनमें पतियों को पीड़ित दिखाया गया है। इस शोध प्रपत्र में इन्हीं कहानियों के माध्यम से पुरुष विमर्श का परिचयात्मक अध्ययन है।
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Pages:24-26
How to cite this article:
आतिश कुमार विश्वकर्मा "हिंदी कहानी में पुरुष विमर्श : एक परिचय". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 24-26
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