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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
अंधेरे का ताला उपन्यास में शिक्षित नारी का संघर्ष
Authors
डॉ. स्मृति उरांव
Abstract
भारतीय समाज में उच्च शिक्षा की वास्तविक दशा का चित्रण अंधेरे का ताला उपन्यास में बहुत ही रोचकता से ममता कालिया द्वारा चित्रित किया गया है। ममता कालिया अपने समकालिन सच्चाई और परिवेशगत जीवन दृष्टि को संवेदनशीलता का यथार्थ चित्रण करती है। भारतीय समाज सभ्यता और संस्कृति की वास्तविकता का समय सापेक्ष शब्दांकन आपके साहित्य की उपलब्धि है। प्रस्तुत उपन्यास महाविद्यालयीन जीवन की सच्चाई को उजागर करते हुए परिवेशगत बदलते हुए शैक्षिक सरोकार उजागर करता है। महाविद्यालय अध्यापक और छात्रों के आपसी व्यवहार अपने आप में पठनीय है। शिक्षा जैसे पवित्र स्थान पर भी समकालिन परिवेश में किस प्रकार उथल-पुथल हो रही है। जिसका प्रमाणित चित्रण उपन्यासकार ने एक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया है।
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Pages:22-23
How to cite this article:
डॉ. स्मृति उरांव
"अंधेरे का ताला उपन्यास में शिक्षित नारी का संघर्ष". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 22-23
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