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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
क्षमा शर्मा की कहानियों में विधवा नारी विमर्श
Authors
सोनम बाजीराव आहेर, डॉ. जितेंद्र पितांबर पाटील
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र समकालीन हिंदी साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर क्षमा शर्मा की कहानियों में व्याप्त 'विधवा नारी विमर्श' की सखोल जाँच करता है। पारंपरिक साहित्य में विधवा को दया और त्याग के रूप में ही दिखाया गया है। किंतु शर्मा जी ने उनके कथा-साहित्य में इस रूप से अलग विधवा नारी को सक्षम रूप में हमारे सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। आज विधवा नारी भी आर्थिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संघर्षों का सामना कर एक सशक्त नारी के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत है। यह शोध पत्र इस समाज में विधवा नारी की स्थिति और उसके अस्तित्व की लड़ाई का विश्लेषण भी करता है। समाज ने विधवाओं को अक्सर नीच दर्जा से ही देखा है। किसी भी उत्सव में अगर विधवा नारी आए तो वह अशुभ माना जाता था। उसे हमेशा ही तुच्छ भाव से देखा जाता था। शर्मा जी ने रचनाओं के माध्यम से इन्हीं रूढ़ि परंपराओं का पर्दाफाश किया है। यह शोध उनकी कहानियों में व्याप्त संवेदना, प्रतिरोध और नारी-अस्मिता के संघर्ष का विश्लेषण करता है।
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Pages:18-21
How to cite this article:
सोनम बाजीराव आहेर, डॉ. जितेंद्र पितांबर पाटील "क्षमा शर्मा की कहानियों में विधवा नारी विमर्श". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 18-21
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