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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
समकालीन हिन्दी साहित्य में मजदूर वर्ग तथा कृषक जीवन
Authors
डॉ. स्मृति उरांव
Abstract
किसान को पूरे संसार का पालनहार कहा जाता है। किसान इस धरती को मां मानकर उसकी झोली धान से भरकर जी-जान से उसकी सेवा करता है। किसी भी मौसम में वह मेहनत करने से पीछे नहीं हटता चाहे बारिश हो या धूप वह अपना कर्तव्य का निर्वहन करता हुआ परिश्रम करता है। तब जाके उसे धान्य की अर्थात् अनाज की प्राप्ति होती है। यहीं हाल मजदूरों का भी होता है। बहुत से लोग मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। कई लोग तो ऐसे भी होते हैं कि काम लेने के बाद भी मजदुर वर्ग को उसके उचित दाम नहीं देते हैं। मजदूर भी एक इंसान है। उससे इंसानियत से पेश आना चाहिए। किन्तु बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि किसान एवं मजदूरों की हालत पर किसी को कोई लेना-देना नहीं है। किसान न जाने कितने वर्षों से साहुकारों, बैंकों के कारण में दबे होते हैं। आज किसान को पालनहार कहा जाता है। किन्तु उनके अभाव को कोई नहीं देखता।
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Pages:16-17
How to cite this article:
डॉ. स्मृति उरांव "समकालीन हिन्दी साहित्य में मजदूर वर्ग तथा कृषक जीवन". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 16-17
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