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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
सुषम बेदी के साहित्य में प्रवासी अनुभव और सांस्कृतिक द्वंद्व
Authors
Sajitha P C, Dr. P Geetha
Abstract
हिंदी साहित्य में प्रवासी लेखन अब एक ऐसी धारा बन चुका है, जो विदेशों में बसे भारतीयों के जीवन को बहुत करीब से समझने और महसूस करने का अवसर देती है। इसमें उनके रोजमर्रा के अनुभव, संघर्ष, खुशियाँ और भीतर छिपी संवेदनाएँ सहज रूप में सामने आती हैं। इस दिशा में सुषम बेदी का योगदान खास तौर पर उल्लेखनीय है। उन्होंने अपने कथा-साहित्य के जरिए प्रवासी भारतीयों के जीवन की जटिलताओं को बहुत ही मानवीय और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है। उनके लेखन में केवल विदेश की चमक-दमक ही नहीं, बल्कि वहाँ जी रहे लोगों का अकेलापन, अपनी पहचान को लेकर उठते सवाल और दो संस्कृतियों के बीच चलने वाला अंदरूनी संघर्ष भी गहराई से महसूस किया जा सकता है।
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Pages:46-48
How to cite this article:
Sajitha P C, Dr. P Geetha "सुषम बेदी के साहित्य में प्रवासी अनुभव और सांस्कृतिक द्वंद्व". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 46-48
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