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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
आदिवासी स्त्री की त्रासदी: अल्मा कबूतरी
Authors
डॉ. स्मृति उरांव
Abstract
आदिवासी जीवन केन्द्रीत उपन्यासकारों ने तटस्थता के साथ पात्रों, समस्याओं, उपेक्षाओं, आकांक्षाओं और अभाव से निर्माण विकृतियों, विडंबनाओं विसंगतियों तथा मानवीय संवेदनाओं को उजागर किया है। वर्तमान हिन्दी साहित्य में मैत्रेयी पुष्पा का बहुमूल्य योगदान है। अल्मा कबूतरी उपन्यास के माध्यम से आदिवासी जीवन का बड़ी ही मार्मिक दृश्य को लेखिका द्वारा प्रस्तुत किया गया है। जनमानस की पीड़ा, स्वर, त्रासदी के साथ-साथ समाज के मानसिकता को अपने उपन्यास के माध्यम से उधेड़ा गया है।
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Pages:46-47
How to cite this article:
डॉ. स्मृति उरांव "आदिवासी स्त्री की त्रासदी: अल्मा कबूतरी". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 46-47
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