ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
समकालीन सिनेमा और पर्यावरणीय यथार्थ: ‘पुष्पा’ फिलिम के संदर्भ में
Authors
निहाला वी पी, डॉ. अब्दुल जब्बार एम
Abstract
विश्व स्तर पर विद्यमान गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में वनोन्मूलन (Deforestation) एक अत्यंत खतरनाक और चुनौतीपूर्ण मुद्दा है। इसके दुष्परिणामस्वरूप पृथ्वी को वैश्विक ऊष्मीकरण, जलवायु परिवर्तन, सूखा, पारिस्थितिक तंत्रों के क्षरण तथा जैव-विविधता के तीव्र ह्रास जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने हेतु विश्व के अनेक देशों ने विभिन्न उपाय अपनाए हैं, जिनमें वृक्षारोपण एक प्रमुख समाधान के रूप में सामने आया है। भारत ने भी वनों के पुनर्स्थापन और संरक्षण की दिशा में कई प्रयास किए हैं। किंतु इसी संदर्भ में वर्ष 2023 में पुष्पा जैसी फिल्म के नायक को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाना एक गंभीर विरोधाभास को उजागर करता है। लालचंदन तस्करी जैसे पर्यावरण-विनाशकारी अपराध से जुड़े एक चरित्र का महिमामंडन, एक ओर जहाँ राज्य द्वारा पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के विपरीत है, वहीं दूसरी ओर यह सांस्कृतिक माध्यमों के माध्यम से पर्यावरणीय मूल्यों के प्रति प्रस्तुत किए जा रहे संदेशों पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
Download
Pages:1-3
How to cite this article:
निहाला वी पी, डॉ. अब्दुल जब्बार एम "समकालीन सिनेमा और पर्यावरणीय यथार्थ: ‘पुष्पा’ फिलिम के संदर्भ में". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 1-3
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

