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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
उत्तराखण्ड राज्य के जौनसार-बावर क्षेत्र के लोक साहित्य का अध्ययन
Authors
डॉ० राजपाल सिंह चौहान
Abstract
भारत में लोकसाहित्य की परम्परा अत्यधिक प्राचीन है। संस्कृत में लोक साहित्य की उत्पत्ति एवं विकास की कथा बडी मनोरंजक है। सुदूर प्राचीन काल में किस प्रकार साहित्य का प्रचार हुआ और किस प्रकार वह भिन्न शताब्दियों से होकर आज भी अपनी स्थिति को बनाये हुए है। यह विषय नित्तांत विचारणीय एवं महत्त्वपूर्ण है। जौनसारी लोक साहित्य उस निर्मल दर्पण के समान है जिसमें जनता जनार्दन का अखिल तथा विराट स्वरूप पूर्ण रूप से प्रतिबिम्बत है। जौनसार लोक साहित्य की निर्मल निर्झरिणी में अवगाहन कर केवल शरीर ही पवित्र नहीं होता है प्रत्युत आत्मा भी पूत और पावन बन जाती है इसलिए जौनसारी लोक साहित्य में जिस समाज का चित्रण किया है वह धर्मभीरू, स्वस्थ, सदाचारी एवं जन कल्याणकारी है। इसमें जिस नीति की प्रतिष्ठा की गयी है वह सवर्धा कल्याणकारी मार्ग की और ले जाने वाली स्वच्छ नदी के समान है इसलिए वह मंगलमय पद की पदर्शिका है, जौनसारी लोक साहित्य सम्पूर्ण संसार में शान्ति एवं प्रेम का सन्देश देता है।
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Pages:50-58
How to cite this article:
डॉ० राजपाल सिंह चौहान
"उत्तराखण्ड राज्य के जौनसार-बावर क्षेत्र के लोक साहित्य का अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 50-58
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