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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
कामायनी में प्रतीकात्मकता तथा आधुनिक मनोवैज्ञानिक दृष्टि
Authors
विशाल प्रताप मित्र
Abstract
जयशंकर प्रसाद की ‘कामायनी’ हिंदी साहित्य की एक अद्वितीय दार्शनिक एवं प्रतीकात्मक कृति है जिसमें मानव चेतना के विविध आयामों का गहन मनोवैज्ञानिक चित्रण मिलता है। यह एक ऐसा महाकाव्य है जो आधुनिक मनुष्य की आत्मयात्रा का रूपक है जहाँ मनु, श्रद्धा और इड़ा जैसे पात्र मानव-मन की जटिल अवस्थाओं का प्रतीक बनकर उभरते हैं। मनु बुद्धि एवं तर्क के प्रतिनिधि हैं तो श्रद्धा भावना और करुणा की प्रतीक है, जबकि इड़ा विज्ञान, ज्ञान और कर्मशीलता की दिशा को उद्घाटित करती है। प्रसाद ने मिथकीय कथा के माध्यम से आधुनिक युग के बौद्धिक-भावनात्मक असंतुलन को व्यक्त किया है। कामायनी में प्रतीक केवल अलंकारिक उपकरण नहीं अपितु आत्मचेतना के बिंब हैं जो मानव के अंतर्मन में चल रहे संघर्ष, पछतावे एवं उससे मुक्ति की प्रक्रिया को उजागर करते हैं। फ्रायड और जुंग के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों से समानता रखते हुए प्रसाद का यह काव्य अचेतन मन, स्वप्न के साथ ही भावनात्मक संतुलन की खोज का भी काव्य बन जाता है। उन्होंने दिखाया कि आधुनिकता का संकट केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक है और उसका समाधान मनुष्य के भीतर छिपे प्रेम, करुणा तथा आत्म-ज्ञान में अन्तर्निहित है। इस प्रकार ‘कामायनी’ आधुनिक मनुष्य के बिखरे हुए व्यक्तित्व को एक समग्र दृष्टि प्रदान करती है जहाँ प्रतीक भाषा बन जाते हैं और कविता आत्मा का दर्पण।
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Pages:44-47
How to cite this article:
विशाल प्रताप मित्र "कामायनी में प्रतीकात्मकता तथा आधुनिक मनोवैज्ञानिक दृष्टि". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 44-47
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