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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 7, ISSUE 1 (2025)
लाइहराओबा और थाबलचोंबारू मणिपुरी संस्कृति के अनूठे पर्वों की सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक भूमिका
Authors
डॉ. चंदम इंगो सिंह
Abstract
मणिपुर राज्य का सांस्कृतिक पर्व लाइहराओबा मैतेई समाज की परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख अंग है। यह उत्सव स्थानीय वन देवताओं (उमंगलाई) की पूजा हेतु आयोजित किया जाता है जिसमें माइबा, माइबी और पेना खोंगबा द्वारा विविध धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस पर्व में सृष्टि की रचना, मानव जीवन की यात्रा और कृषि संस्कृति को गीतों, नृत्यों और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। लाइहराओबान केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। इसके अंतर्गत चार प्रकार दृ कंलै, मोइराङ, ककचिङ और चकपा लाइहराओबा प्रचलित हैं।
थाबल चोंबा मणिपुर का एक पारंपरिक नृत्य है जो मूलतः चांदनी रात में सामूहिक रूप से वृत्ताकार होकर किया जाता है। यह पहले धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का हिस्सा था, किंतु बाद में याओशंग (होली) उत्सव का अभिन्न हिस्सा बन गया। इसका नाम श्थाबलश् (चांदनी) और श्चोंबाश् (कूदना) से मिलकर बना है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, इसका संबंध सृष्टिकर्ता गुरु शिदबा और उनके पुत्रों से जुड़ा हुआ है, जिसमें यह नृत्य पाखंबा को बचाने के लिए भेजे गए देवताओं के माध्यम से आरंभ हुआ।
निष्कर्षतः लाइहराओबा और थाबल चोंबादोनों ही मणिपुरी समाज की गहरी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का प्रतीक हैं, जो परंपराओं को जीवित रखते हुए समुदाय में एकता, श्रद्धा और सांस्कृतिक गौरव का संचार करते हैं।
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Pages:13-16
How to cite this article:
डॉ. चंदम इंगो सिंह "लाइहराओबा और थाबलचोंबारू मणिपुरी संस्कृति के अनूठे पर्वों की सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक भूमिका". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 1, 2025, Pages 13-16
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