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VOL. 6, ISSUE 1 (2024)
हरियाणवीं छन्नों की लोक सांस्कृतिक विशेषताओं का मूल्यांकन
Authors
महासिंह पूनिया
Abstract
उपर्युक्त अध्ययन के पश्चात् कहा जा सकता है कि हरियाणवीं लोकजीवन में दम तोड़ रही ‘छन्न विधा’ परम्परागत रूप से सदियों पुरानी रही है। लेकिन वर्तमान दौर में आधुनिकता की चपेट में आने के पश्चात् इसका वजूद खतरे में पड़ गया है। इस विधा के अन्तर्गत अनेक विशेषताएं समाहित हैं, जो हमारे समाज की परम्परागत संस्कारों की परिचायक ही नहीं, अपितु लोकजीवन की साक्षात् अभिव्यक्ति भी हैं। ‘छन्न’ जहां एक ओर दोनों परिवारों में परस्पर समन्वयता स्थापित करने का कार्य करता है, वहीं पर दूल्हा-दुल्हन के यार-दोस्तों एवं सखी-सहेलियों को परस्पर घुलने-मिलने का अवसर पर भी प्रदान करता है, ताकि दोनों पक्षों का भावी-जीवन सुखद एवं सुनहरा हो सके। आधुनिक दौर में बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव के कारण ‘छन्न’ की महत्ता और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि आधुनिकता की इस दौड़ में वैवाहिक एवं पारिवारिक रिश्तों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। कारण स्पष्ट है कि हम अपनी पुरातन परम्पराओं को भुलते जा रहे हैं। ‘छन्न’ विधा पर अभी तक कोई शोध नहीं हुआ है। ऐसे विषयों को शोध का विषय जरूर बनाया जाना चाहिए, जो हरियाणवीं लोकसमाज के पारम्परिक मूल्यों की स्थापना में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। ‘छन्न’ एक ऐसी ही विधा है, जो हमारे लोकजीवन के मूल्यों को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती रही है।
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Pages:25-27
How to cite this article:
महासिंह पूनिया "हरियाणवीं छन्नों की लोक सांस्कृतिक विशेषताओं का मूल्यांकन". International Journal of Research in Hindi, Vol 6, Issue 1, 2024, Pages 25-27
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