Logo
International Journal of
Research in Hindi
ARCHIVES
VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
रसखान के काव्य में भारतीय संस्कृति का दिग्दर्शन
Authors
डॉ० अरविन्द कुमार उपाध्याय
Abstract
रसखान के काव्य का सांस्कृतिक मूल्यांकन भारतीय संस्कृति के विविध संस्कृतियों का संगम है। रसखान के काव्य की संस्कृति सभी संस्कृतियों को एक धांगे में पिरोने का काम करती है। रसखान के काव्य में कृष्ण भारतीय संस्कृति के दिव्य प्रतिमान है। भगवान कृष्ण को रसखान प्रभु के रूप में स्वीकार करते हैं जब कि कृष्ण का संबंध भगवत् गीता, महाभारत तथा भागवत से है। रसखान कृष्ण भक्त हैं वे सगुण तथा निर्गुण दोनों रूपों में भगवान के प्रति अपना व्यापक दृष्टिकोण प्रदर्शित करते है। रसखान ने भगवान कृष्ण के सभी लीलाओं जैसे बाललीला, रासलीला, फागलीला, कुंजलीला, प्रेमवाटिका, सुजान रसखान आदि लीलाओं को अपने काव्य में बहुत ही बख़ूबी ढंग से एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया है।रसखान का वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था परन्तु भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन होने के पश्चात् अपना नाम रसखान रखा और वे मुस्लिम से हिन्दू हो गए।
Download
Pages:7-8
How to cite this article:
डॉ० अरविन्द कुमार उपाध्याय "रसखान के काव्य में भारतीय संस्कृति का दिग्दर्शन". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 7-8
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.