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VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
स्वातंत्र्योत्तर स्त्री यात्रा साहित्यकारों में ’शिवानी’ का योगदान (’यात्रिक’ रचना के संदर्भ में)
Authors
डॉ. सविता अजित सिंग, कांबळे रेश्मा मारूती
Abstract
‘यात्रिक’ (1980) रचना में ‘शिवानी’ ने मानवीय संबंधों और भावनाओं को अभिव्यक्त किया है। शिवानी ने यात्रासाहित्य के साथ संस्मरण, रेखाचित्र आदि विद्याओं में भी बराबर लेखन किया है। जिससे हर वर्ग और हर रूची के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते है। अपने संपर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा और उसे कलाकृति बना दिया। जिसके द्वारा अपने परिचय के दायरे में आए विभिन्न लोगों और घटनाओं के बहाने से अपनी संवेदना और अनुभवों को स्वर दिया है। इनका साहित्य हिंदी पाठकों के बीच अत्याधिक लोकप्रिय हुआ है। चाहे उपन्यास हो, कहानियाँ हो या उनके यात्रा वृत्तांत, उसमें प्रकृति का मनोरम, मनभावन चित्रण मिलता है। यहीं उनकी अभिव्यक्ति एवं भाषा का सामर्थ्य है। ‘यात्रिक’ यह रचना निःसंदेह इन्हीं विशेषता से युक्त है।
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Pages:1-3
How to cite this article:
डॉ. सविता अजित सिंग, कांबळे रेश्मा मारूती "स्वातंत्र्योत्तर स्त्री यात्रा साहित्यकारों में ’शिवानी’ का योगदान (’यात्रिक’ रचना के संदर्भ में)". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 1-3
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