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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
यति धर्म एवं स्त्री
Authors
साध्वी अनुग्या, डा. मैथिली प्र. राव
Abstract
समाज एवं संस्कृति के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में उभरता है धर्म । धर्म की विकास यात्रा अपने आप में एक बहुत ही जटिल प्रयत्न रहा है। इससे भी बढकर कठिन रहा है धार्मिक परिवेश में स्त्री को समान अवसर प्रदान करना या पुरुषों की भांति उन्हें भी अनेक अधिकार प्राप्त होना । एक ओर, कई लोग मानते हैं कि धर्म स्वाभाविक रूप से दमनकारी संस्था है, जो स्वभाव से महिलाओं को बाहर करती है और उन्हें पुरुषों के बराबर नहीं बनाती है। दूसरी ओर, तथ्य यह है कि कई महिलाएं खुद को नारीवादी और धार्मिक दोनों के रूप में देखती हैं, जिसके अंतर्गत धर्म के नारीवादी दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए हैं। प्रस्तुत आलेख का मुख्य उद्देश्य बहस करना या यह तय करना नहीं है कि क्या धर्म पितृसत्तात्मक है, या क्या वह स्वाभाविक रूप से महिलाओं के लिए दमनकारी हैं? इसका उद्देश्य है उन महिलाओं के प्रति मुख्यधारा के नारीवाद की ओर से लगातार बहिष्कृत दृष्टिकोण पर सवाल उठाना है जिन्होंने यति धर्म के पालन का निर्णय लिया है ।
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Pages:8-11
How to cite this article:
साध्वी अनुग्या, डा. मैथिली प्र. राव "यति धर्म एवं स्त्री". International Journal of Research in Hindi, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 8-11
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