Logo
International Journal of
Research in Hindi
ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 1 (2022)
जगदीशचंद्र कृत ‘धरती धन न अपना’ में दलित नारी चित्रण
Authors
जी. वसंती
Abstract
उपन्यास साहित्य के क्षेत्र में जगदीशचंद्र जी का योगदान अमर है। उन्होंने उपन्यास रचना द्वारा हिन्दी उपन्यास के एक महत्वपूर्ण स्थान पूर्ति की है। दलित जीवन, भारतीय समाज का बहुत बड़ा हिस्सा है, जो सामाजिक जीवन में तो उपेक्षित रहा ही है, सृजनात्मकता के क्षेत्र में भी बहुत उपेक्षित रहा है। जगदीशचंद्र इस जीवन को केन्द्र में रख अपनी उपन्यास - त्रयी रची है, जो अब हिन्दी उपन्यास साहित्य व भारतीय साहित्य की एक अनुपम उपलब्धि है। जगदीशचंद्र्र जी को उनके ‘धरती धन न अपना’ उपन्यास से लोकप्रियता हासिल हुई। यह उपन्यास दलित जीवन की महागाथा के रूप में सामने आता है। उन्होंने ‘धरती धन न अपना’ में दलित नारी समस्याओं में पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं का चित्रण अधिक मात्रा में हुआ है। सामाजिक समस्याओं में दलित नारी के प्रति समाज का दृष्टिकोण, आर्थिक परतंत्रता, दमन एवं शोषण, बदलते स्त्री-पुरुष संबंध, अन्याय-अत्याचार आदि मुख्य समस्याओं का चित्रण किया है। इस शोध आलेख में जगदीशचंद्र जी कृत ‘धरती धन न अपना’ में चित्रित दलित नारी समस्याओं को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है।
Download
Pages:29-31
How to cite this article:
जी. वसंती "जगदीशचंद्र कृत ‘धरती धन न अपना’ में दलित नारी चित्रण". International Journal of Research in Hindi, Vol 4, Issue 1, 2022, Pages 29-31
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.