Logo
International Journal of
Research in Hindi
ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 3 (2021)
छायावादी कविताओं में मुक्ति का आग्रह
Authors
बिद्या दास
Abstract
हृदयगत भावों को उन्मुक्त कर उसकी स्वच्छन्द अभिव्यक्ति मनुष्य जीवन की सर्वप्रथम मुक्ति है। वस्तुतः छायावादी कवि आरंभ से ही मानव-मुक्ति के पक्षधर रहे हैं। व्यक्तिगत जीवन के सत्य को अभिव्यक्त करने वाले इन कवियों ने अपने जीवन के निजी प्रसंगों, घटनाओं एवं भावनाओं को कविता का केन्द्र बनाया। रूढ़िगत जड़ता से मुक्ति और मुक्ति के लिए विद्रोह जैसे प्रबल भाव को अपनाया। और यह भाव आगे चलकर क्रान्तिकारी चेतना के रूप में परिलक्षित होती है। छायावादी कवियों ने अपनी रचनाओं में करूणा, दर्द, पीड़ा, वेदना को रचनात्मक अभिव्यक्ति दी हैं। उनकी कविताओं में मुक्ति का आग्रह प्राचीन रस, छन्द, अलंकार, एवं भाषा-शिल्प के संदर्भ में भी दिखायी पड़ता है।
Download
Pages:01-06
How to cite this article:
बिद्या दास "छायावादी कविताओं में मुक्ति का आग्रह ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 3, 2021, Pages 01-06
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.