ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 2 (2021)
हजारीप्रसाद द्विवेदी की इतिहास दृष्टि
Authors
डॉ. आभा शर्मा
Abstract
हजारीप्रसाद द्विवेदी परम्परावादी दृष्टि के साहित्येतिहासकार हैं। द्विवेदी जी ने हिन्दी साहित्य का निरूपण संपूर्ण भारतीय साहित्य के स्वाभाविक विकास के रूप में किया है. हिन्दी साहित्य और उसके विकास के बारे में शुक्ल जी की स्थापनाओं से उन्होंने कई आधारों पर अपना मतभेद प्रकट किया. उनकी मान्यता है कि भारतीय चिंतन और भारतीय साहित्य का सहज रूप से विकास हुआ है. इसलिए बाहरी प्रभावों को अत्यधिक महत्व देने से इसके वास्तविक स्वरूप को नहीं समझा जा सकता. द्विवेदीजी ने अपनी पुस्तक में विस्तार से उन कारणों और परिस्थितियों की व्याख्या की है जिनसे हिन्दी साहित्य का विकास संभव हुआ. साहित्येतिहास-लेखन में काल-विभाजन, नामकरण और कवियों तथा उनकी रचनाओं के मूल्यांकन के बारे में द्विवेजी ने शुक्ल जी की बातों से अपनी सहमति दर्शाते हुए भी कुछ नयी खोजें की हैं. उन्होंने शुक्ल जी द्वारा किए गए नामकरण, ‘आदिकाल’ और ‘भक्तिकाव्य’ के मूल्यांकन आदि की दृष्टि से अपनी असहमति व्यक्त की और अपनी नयी मान्यताएँ प्रस्तुत कीं.
Download
Pages:49-55
How to cite this article:
डॉ. आभा शर्मा "हजारीप्रसाद द्विवेदी की इतिहास दृष्टि ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 2, 2021, Pages 49-55
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

