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VOL. 3, ISSUE 2 (2021)
प्रवासी साहित्य में महिला लेखिकाओं का स्त्री पक्ष
Authors
कंचन शामदिया
Abstract
प्रवासी साहित्य में महिला लेखिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रवासी हिंदी साहित्य आज समृद्ध हो चुका है। आज प्रवासन की प्रक्रिया हमारे समक्ष दूसरे रूपों में प्रस्तुत है। महिला रचनाकारों ने अपनी रचना के माध्यम से प्रवासी लोगों के जीवन के विविध पक्षों को बहुत ही बेबाकी से प्रस्तुत किया है। प्रवासी हिन्दी साहित्यकार ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, गुयाना, माँरिशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद आदि स्थानों को अपनी कर्मभूमि स्वीकार कर साहित्य सृजन करते आये हैं। उन्होंने विदेशों को अपनी कर्मभूमि बनाया है। 20वीं सदी में प्रवासी भारतीयों ने भारतीयता की अस्मिता को जिन्दा रखने की भरसक कोशिश की है। प्रवासी साहित्य पहले जो उपलब्ध था, उससे आज का प्रवासी साहित्य एकदम अलग है। प्रवासी हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत कहानी, उपन्यास, कविताएं, नाटक, निबन्ध, एकांकी, महाकाव्य, खण्डकाव्य, अनुदित साहित्य, यात्रा वर्णन, आत्मकथा आदि का सृजन हुआ है। प्रवासी साहित्य की सबसे विशिष्ट बात यह है कि वहाँ महिला साहित्यकारों की भागीदारी पुरूष साहित्यकारों से अधिक है, तथा वह भारतीय महिला लेखन की भाँति हाशिये पर नहीं खड़ा है और न ही किसी एक बनी-बनायी परिपाटी को लेकर चल रहा है, बल्कि अपनी विषय वैविध्यता के कारण मुख्य धारा में सम्मिलित है। यह मात्र स्त्री संवेदना को ही नहीं व्यक्त करता बल्कि पश्चात्य परिवेश से जूझ रहे प्रत्येक व्यक्ति की संवेदना को स्वर प्रदान करता है। प्रवासी साहित्य में महिला लेखिकाओं का स्त्री पक्ष बहुत ही मजबूत साबित हो रहा है। प्रवासी साहित्य में अपनी लेखनी के दम पर अपनी पहचान को स्थापित करती हैं। इनके लेखन कार्य की जितनी भी प्रशंसा की जाय वह उतना ही कम है।
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Pages:15-20
How to cite this article:
कंचन शामदिया "प्रवासी साहित्य में महिला लेखिकाओं का स्त्री पक्ष ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 2, 2021, Pages 15-20
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