ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 2 (2021)
श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में सदाचार और चढ़दी कला का स्वरूप
Authors
रमनदीप कौर
Abstract
साहित्य समाज को दिशा-निर्देश देता है, साहित्य मनुष्य को सही-गलत और उचित-अनुचित के बारे में बताता है। युग परिवर्तन होने के साथ-साथ साहित्य भी परिवर्तित होता रहा। मध्यकाल में परिस्थितियाँ उथल-पुथल से भरी थीं, इस समय हिन्दू-मुस्लिम को लेकर बहुत विवाद होने लगे, जिस कारण लोग हताश और निराश हो गए थे। लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए कई सन्त-महात्मा हुए जिन्होंने अपनी वाणी द्वारा मानव जाति को उचित रास्ते पर चलने और परिस्थितियों का सामना करने को कहा। मध्यकाल में जो सन्त कवि हुए उन्होंने जो काव्य लिखा इसमें बुराई की प्रताड़ना की गई और अच्छाई के रास्ते पर चलने का उपदेश दिया। लोगों में झूठ, चोरी, हिंसा इत्यादि कई प्रकार की अमानवीय क्रियाएं फैली हुई थी, जो सन्त-महात्मा हुए उन्होंने लोगों को सत्य, ईमानदारी, अहिंसा, नम्रता, मानवता का पाठ पढ़ाया। सन्तों द्वारा सदाचार की बात करते हुए मनुष्य के व्यवहार को लेकर जो उपदेश दिए गए उन पर हम विचार और उन्हें जीवन में धारण करने की आवश्यकता है। मानव को अपना व्यवहार, आचरण शुध्द रखना चाहिए तभी वह परमात्मा के नाम का जाप कर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। आज भी यह कहा जाता है कि जिस प्रकार का व्यवहार हम चाहते हैं कि लोग हमसे करें तो हमें भी दूसरों से उसी प्रकार का व्यवहार करना चाहिए। मानवता का पाठ गुरुओं ने हमें पढ़ाया, गुरु ग्रन्थ साहिब में जितने भी गुरुओं की वाणी है उनमें हमें सदाचारपूर्ण जीवन जीने का उपदेश दिया गया है। गुरबाणी समस्त मानव जाति का मार्गदर्शन करती है, सदाचार की पालना करते हुए हमें चढ़दी कला में रहने का उपदेश भी देती है। ‘चढ़दी कला’ का अर्थ है साकारात्मक सोच को धारण करना अर्थात जीवन में कितनी भी मुश्किलों का सामना करना पड़े कभी भी अपने आप को निराश नहीं होने देना, भगवान् का नाम लेते रहो और अपना कर्म करो। प्रत्येक प्राणी को अपने जीवन में बहुत से मुश्किल हालातों से गुजरना पड़ता है, पर समय अच्छा-बुरा कोई भी हो कभी भी ठहरता नहीं गुजर ही जाता है तो गुरबाणी हमें यही संदेश देती है कि प्रतिकुल परिस्थितियों में भी धैर्य और संयम रखते हुए, परमात्मा का जाप करते हुए सदैव चढ़दी कला में रहना चाहिए।
Download
Pages:07-10
How to cite this article:
रमनदीप कौर "श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में सदाचार और चढ़दी कला का स्वरूप ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 2, 2021, Pages 07-10
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

