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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 3, ISSUE 1 (2021)
हिंदी कथा साहित्य में चित्रित किन्नर विमर्शः “नियति” कहानी के विशेष संदर्भ में।
Authors
डॉ. जयश्री. ओ.
Abstract
भारतीय समाज में जब लिंग की बात की जाती है तो आमतौर पर दो ही लिंग की बात होती है जैसे स्त्रीलिंग और पुल्लिंग। सामाजिक संरचना भी इन दोनों पर अधिष्ठित माना जाता है। लेकिन पौराणिक युग से ही एक अन्य प्रजाति का अस्तित्व हम देख सकते हैं जो न नर होता है न नारी, जिसे वर्तमान समाज थर्ड जेंडर, किन्नर, हिजडा, शिखण्डी जैसे नामों से पुकारा जाता है। स्त्री या पुरुष की श्रेणी में न आनेवाले ये लोग दूसरों केलिए केवल परिहास या मनोरंजन की वस्तु है। समाज के हिस्से होने पर भी पशु से बदत्तर जीवन जीने केलिए अभिशप्त इस बेचारे वर्ग के जीवन की विडम्बनाओं का यथार्थ चित्रण डॉ. लक्ष्मी दीक्षित ने अपनी कहानी ‘नियति’ के माध्यम से किया है। यह कहानी इस बात पर बल देती है कि अधूरे तन के इस जन्म को किसी भी शक्ति से पूर्ण नही कर सकते लेकिन उसे यह चिंतित करने केलिए बाध्य कर देती है कि परिस्थितियाँ अटल हैं लेकिन अपने भाग्य रचयिता स्वयं आप ही है।
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Pages:18-21
How to cite this article:
डॉ. जयश्री. ओ. "हिंदी कथा साहित्य में चित्रित किन्नर विमर्शः “नियति” कहानी के विशेष संदर्भ में। ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 1, 2021, Pages 18-21
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