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VOL. 3, ISSUE 1 (2021)
सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य से योगिता यादव की कहानियाँ
Authors
स्वप्ना चतुर्वेदी
Abstract
नवलेखन पुरस्कार ज्ञानपीठ संस्था द्वारा युवा रचनाकारों जिनकी उम्र ४० साल या उससे कम को उनकी पहली प्रभावशाली रचना के लिए दिया जाता है। योगिता यादव को २०१२ में उनकी कहानी संग्रह क्लीन चिट के लिए नवलेखन पुरस्कार मिला। इनकी कहानियों में कई महत्वपूर्ण आयाम और विमर्श परिलक्षित हैं। इन्होंने अपनी स्वतंत्र सोच से हिन्दी साहित्य को एक नया स्वरूप प्रदान किया है। इनकी कहानियों की नारी विद्रोही हैं लेकिन किसी भी सामाजिक व्यवस्था का अनादर नहीं करती है। इनकी कहानियों में नारी विमर्श के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम भी दिखाई देते हैं। आधुनिक स्त्री समाज के नियमों और बंधनों का बहिष्कार नहीं करती हैं लेकिन उन्हें बदलने की सतत कोशिश करती हैं। जो इनकी कहानियों में परिलक्षित है। इस आलेख द्वारा इनकी कहानियों में सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को उजागर किया गया है।
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Pages:01-04
How to cite this article:
स्वप्ना चतुर्वेदी "सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य से योगिता यादव की कहानियाँ". International Journal of Research in Hindi, Vol 3, Issue 1, 2021, Pages 01-04
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