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VOL. 2, ISSUE 4 (2020)
एक ब्रेक के बाद उपन्यास में बदलते वैश्वीकृत बाजारीकरण का अध्ययन
Authors
सगीर अहमद, डॉ. अजय कुमार
Abstract
कुल मिलाकर देखा जाए तो लेखिका ने अपने उपन्यास में वैश्वीकरण प्रदत लगभग सभी पहलुओं पर चिंता जाहिर की है। विकास के नाम पर विस्थापन का दंश बार-बार उपन्यास में आता है। बाजारीकरण के मानदंडों को बदलने वाले विज्ञापन की संस्कृति पर भी लेखिका की चिंता जाहिर होती है कि किस प्रकार विज्ञापन ने हमें अपने नियंत्रण में ले लिया है। अब विज्ञापन ही तय कर रहा है कि हमें क्या लेना है, क्या नहीं बड़ी-बड़ी मल्टीस्टोरल कंपनियां किस प्रकार बड़े-बड़े फिल्मी स्टारों को विज्ञापन का केंद्र बनाकर एक-एक दिन में करोड़ों करोड़ों कमा रही हैं तथा अमीर गरीब के खाई किस प्रकार बढ़ती जा रही है चिंता व्यक्त की है। विदेशी कारपोरेट कंपनियां विकास के नाम पर सरकारों से मिलकर उनके ही देश के लोगों को कैसे पिटवा रही हैं बरबस चित्रण हमें देखने को मिलता है। संपूर्ण उपन्यास में लेखिका का दूरदर्शी अर्थशास्त्रीय व समाजशास्त्रीय अध्ययन दिखता है।
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Pages:51-53
How to cite this article:
सगीर अहमद, डॉ. अजय कुमार "एक ब्रेक के बाद उपन्यास में बदलते वैश्वीकृत बाजारीकरण का अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 2, Issue 4, 2020, Pages 51-53
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