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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 2, ISSUE 4 (2020)
त्यागपत्र: सामाजिक मंगलकांक्षाओं के लिए मृणाल का आत्मदहन
Authors
राजीव कुमार प्रसाद
Abstract
‘त्यागपत्र’ जैनेंद्रजी की अद्भुत कला का कौशल है, इसमें एकमात्र मृणाल के व्यकितत्व की कहानी है| उसके माता-पिता नहीं हैं| भाई का स्नेह उनके स्नेह की पूर्ति नहीं कर सका| वह जीवन भर भटकती हुई, घोर यंत्रणाए झेलती हुई अतृप्ति की ही आहुति बन जाती है| मृणाल द्वारा समाज के नैतिक मान्यतायों का खोखलापन तथा विरोधाभास उदघाटित किया गया है| दार्शनिक धरातल पर मृणाल भले ही प्रत्यक्ष रूप से असफल और पराजित ही क्यों न हुई है, पर आत्मा और हृदय के धरातल पर वह सफल और अपराजेय है| मृणाल एक आदर्श प्रस्तुत करती है जिसमे प्रेम और मानवीय करुना की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है| ‘त्यागपत्र’ के नायक प्रमोद का त्यागपत्र अपनी नौकरी से त्यागपत्र नहीं, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था से है जिसके थेपेरों में एक निरीह, सीधी-साधी बहन-बेटी तिल-तिलकर घुटते हुए अंत में समाज के ही एक नरक वेश्यालय में पहुँचकर रुग्णावस्था में अपना जीवन समाप्त करती है| प्रारंभ में शीला के भाई के साथ प्रेम सम्बन्ध, प्रमोद जो उसका भातीजा है- का उसकी ओर आकर्षित होना| मृणाल की शादी प्रौढ़ व्यक्ति से होना, पति द्वारा त्यागा जाना, कोयले वाले के साथ भागना, वेश्याओं के बीच रहना, उसके दु:ख दर्द की भीषण स्थिति है| त्यागपत्र का फलक अत्यंत विस्तृत है| मनोविश्लेषण द्वारा इस उपन्यास में मर्यादाओं को तोड़ा गया है और नये विचारों, नई मान्यताओं को जोड़ा गया है| जैनेन्द्र कुमार की लेखनी में नारी पात्रों के प्रति अपार सहानुभूति है| पाठक का हृदय ‘त्यागपत्र’ को पढ़ने के बाद करुणा से भर उठता है, जो कि जैनेन्द्र के चरित्र-चित्रण की विशेषता है|
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Pages:09-11
How to cite this article:
राजीव कुमार प्रसाद "त्यागपत्र: सामाजिक मंगलकांक्षाओं के लिए मृणाल का आत्मदहन". International Journal of Research in Hindi, Vol 2, Issue 4, 2020, Pages 09-11
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