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VOL. 2, ISSUE 3 (2020)
किशोरावस्था के बालक-बालिकाओं के शैक्षिक उपलब्धि पर संवेगात्मक बु़ि़द्ध का प्रभाव
Authors
अशोक कुमार
Abstract
वर्तमान दौर प्रतिस्पद्र्धा का है,जहाँ छात्रों के लिए अपनी योग्यतानुसार क्षमता और प्रभावशीलता विकसित करना उनके लिए एक चुनौतिपूर्ण कार्य है। ऐसे में जीवन के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा की आवश्यकता महसूस की जाती है। मानव जाति के विकास का आधार शिक्षा प्रणाली है। प्रत्येक मनुष्य के अन्दर कुछ जन्मजात शक्तियाँ निहित होती है इन शक्तियों के प्रस्फुटन से ही व्यक्ति का विकास होता है। निःसन्देह शिक्षा ही मानव की योग्यताओं के अधिकतम विकास की सर्वाधिक सरल व्यवस्थित एवं प्रभावी विद्या है। और यह कार्य मनुष्य के जन्म से प्रारम्भ हो जाता है। बच्चे के जन्म के कुछ दिन बाद ही उसके माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्य उसे सुनना और बोलना सिखाने लगते है। जब बच्चा कुछ बड़ा हो जाता है तो उसे उठने, बैठने चलने, फिरने, खाने-पीने तथा सामाजिक आचरण की विधियाँ सिखाई जाने लगती है। जब वह तीन चार वर्ष का होता है तो उसे पढ़ना लिखना सिखाने लगते है इसी आयु में उसे विद्यालय भेजना प्रारम्भ किया जाता है। इस अवस्था को शैशवावस्था कहते है। शिक्षा की दृष्टि से मानव जीवन में शैशवावस्था का अत्यन्त महत्व है। वेलेन्टाइन ने तो शैशवावस्था को सीखने का आदर्शकाल कहा है। मनोवैज्ञानिक वाट्सन के अनुसार विकास की अन्य किसी अवस्था की तुलना मंे शैशवास्था में सीखने का क्षेत्र तथा तीव्रता अधिक व्यापक होता है।संवेगात्मक बुद्धि अपने व दूसरों क संवेगों को पहचानने, समझने व उनका प्रबंधन करने के साथ-साथ एक छात्र को उसकी शैक्षिक सम्प्राप्ति के लिए उसकी मदद करता है जो शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का प्रतिफल होता है। इस पत्र का उद्देश्य उन कारकों की खोज करना था जो संवेगात्मक बुद्धि के विकास को प्रभावित करते है और जिनका छात्रों की शैक्षिक सम्प्राप्ति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। संवेगात्मक बुद्धि के बिना शैक्षिक सम्प्राप्ति की भविष्यवाणी करना सम्भव नहीं है। अतः हम कह सकते हैं कि संवेगात्मक बुद्धि छात्रों की स्कूल, कार्यस्थल एवं जीवन की विभिन्न परिस्थितियों एवं क्षेत्रों में उनकी सहायता कर सकता हैं।
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Pages:06-09
How to cite this article:
अशोक कुमार "किशोरावस्था के बालक-बालिकाओं के शैक्षिक उपलब्धि पर संवेगात्मक बु़ि़द्ध का प्रभाव". International Journal of Research in Hindi, Vol 2, Issue 3, 2020, Pages 06-09
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