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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 1, ISSUE 2 (2019)
दिशाहीन होती युवापीढ़ी एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
कृष्ण कुमार शर्मा
Abstract
जब किसी के ह्रदय की वेदना अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाती है तो साधारण व्यक्ति हो या कितना भी गंभीर इंसान ही क्यों न हो हर कोई अपनी अभिव्यक्ति प्रकट करने के लिए आतुर हो जाता है, और यही मेरे साथ भी हुआ है| आज जब मैं युवाओं को देखता हूँ तो देश और उनके भविष्य को सोचकर मन सिहर उठता है|
आँखों में उम्मीद के सपने, नयी उड़ान भरता हुआ मन, कुछ कर दिखाने का दमखम और दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने का साहस रखने वाला युवा कहा जाता है। युवा शब्द ही मन में उडान और उमंग पैदा करता है। उम्र का यही वह दौर है जब न केवल उस युवा के बल्कि उसके राष्ट्र का भविष्य तय किया जा सकता है। आज के भारत को युवा भारत कहा जाता है क्योंकि हमारे देश में असम्भव को संभव में बदलने वाले युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। आंकड़ों के अनुसार भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष आयु तक के युवकों की और 25 साल उम्रं के नौजवानों की संख्या 50 प्रतिशत से भी अधिक है। ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि क्या हमारी युवापीढ़ी दिशाहीन हो रही है ? महत्वपूर्ण इसलिए भी यदि युवा शक्ति का सही दिशा में उपयोग न किया जाए तो इनका जरा सा भी भटकाव राष्ट्र के भविष्य को अनिश्चित कर सकता है।
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Pages:03-06
How to cite this article:
कृष्ण कुमार शर्मा "दिशाहीन होती युवापीढ़ी एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 1, Issue 2, 2019, Pages 03-06
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