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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
शाक्त परम्परा एवं पर्यावरण संरक्षण : दुर्गा कवच का इको-क्रिटिकल एवं सांस्कृतिक पारिस्थितिकीपरक अध्ययन
Authors
डॉ. निधि उप्रेती
Abstract
भारतीय शाक्त परम्परा में देवी को समस्त प्रकृति की अधिष्ठात्री शक्ति माना गया है। दुर्गा कवच, मार्कण्डेय पुराण के दुर्गा सप्तशती का एक लोकप्रिय अंश, देवी के नौ विभिन्न रूपों के माध्यम से रक्षा और संतुलन की बात करता है। इस शोध में इको-क्रिटिकल (Ecocritical) और सांस्कृतिक पारिस्थितिकी (Cultural Ecology) की पद्धतियों से दुर्गा कवच का विश्लेषण किया गया है। कवच में वर्णित देवी के वाहन (जैसे ऐन्द्री का गज, कौमारी का मयूर आदि) जैव-विविधता का प्रतीक हैं, तथा दिशाओं की रक्षक देवियों की चर्चा पारिस्थितिक संतुलन के सार्वभौमिक अवधारणा को दर्शाती है। अन्त में “यावद् भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्” जैसा श्लोक वन एवं पर्वतों की रक्षा का संकेत देता है। समकालीन जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता संकट की चुनौती में यह परम्परा हमें प्रकृति संरक्षण की नैतिक और सांस्कृतिक सीख देती है। निष्कर्षतः दुर्गा कवच न केवल आध्यात्मिक कवच है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पारिस्थितिकी में पर्यावरणीय चेतना का सूत्रपात भी है।
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Pages:56-59
How to cite this article:
डॉ. निधि उप्रेती "शाक्त परम्परा एवं पर्यावरण संरक्षण : दुर्गा कवच का इको-क्रिटिकल एवं सांस्कृतिक पारिस्थितिकीपरक अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 56-59
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