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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
मृदुला गर्ग और मैत्रेयी पुष्पा के साहित्य में नारी चेतना : एक तुलनात्मक अध्ययन
Authors
दीपिका
Abstract
समकालीन हिंदी साहित्य में नारी चेतना एक महत्वपूर्ण वैचारिक एवं साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में स्थापित हुई है। यह चेतना केवल स्त्री की सामाजिक स्थिति का वर्णन नहीं करती, बल्कि उसके आत्मबोध, स्वाभिमान, अधिकार-बोध तथा स्वतंत्र अस्तित्व की खोज को भी अभिव्यक्ति प्रदान करती है। आधुनिक हिंदी कथा-साहित्य में अनेक महिला रचनाकारों ने स्त्री जीवन की विविध समस्याओं, चुनौतियों और संघर्षों को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया है। इस संदर्भ में मृदुला गर्ग और मैत्रेयी पुष्पा का साहित्य विशेष महत्व रखता है। दोनों लेखिकाओं ने स्त्री जीवन के उन पक्षों को उजागर किया है जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक संरचनाओं और परंपरागत मान्यताओं के कारण उपेक्षित किया जाता रहा। मृदुला गर्ग के साहित्य में शिक्षित, जागरूक और आत्मचेतस स्त्री का स्वर प्रमुखता से उभरकर सामने आता है। उनकी रचनाओं में स्त्री अपने व्यक्तिगत निर्णयों, भावनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक पहचान के लिए संघर्ष करती दिखाई देती है। वे स्त्री को केवल परिवार और संबंधों की सीमाओं में नहीं देखतीं, बल्कि उसे एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती हैं। दूसरी ओर, मैत्रेयी पुष्पा का साहित्य ग्रामीण एवं अंचलीय परिवेश की स्त्रियों के जीवन-संघर्षों का सशक्त दस्तावेज़ है। उनकी रचनाओं में स्त्री सामाजिक विषमताओं, लैंगिक भेदभाव, रूढ़ियों तथा पितृसत्तात्मक व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष करती हुई दिखाई देती है। उनके पात्र आत्मसम्मान, साहस और प्रतिरोध की भावना से युक्त हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में इन दोनों लेखिकाओं के साहित्य में निहित नारी चेतना का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया है कि दोनों रचनाकार स्त्री-अस्मिता, स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक न्याय के प्रश्नों को किस प्रकार अभिव्यक्त करती हैं। यद्यपि दोनों की रचनात्मक भूमि, सामाजिक परिवेश और अभिव्यक्ति की शैली अलग-अलग है, फिर भी उनका मूल उद्देश्य स्त्री को उसके अधिकारों, गरिमा और आत्मनिर्णय की शक्ति के प्रति जागरूक करना है। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि मृदुला गर्ग और मैत्रेयी पुष्पा दोनों ने अपने साहित्य के माध्यम से नारी चेतना को व्यापक सामाजिक विमर्श का विषय बनाया तथा हिंदी साहित्य में स्त्री-विमर्श को नई दिशा और सार्थकता प्रदान की है।
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Pages:52-55
How to cite this article:
दीपिका "मृदुला गर्ग और मैत्रेयी पुष्पा के साहित्य में नारी चेतना : एक तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 52-55
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