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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
‘घर का जोगी जोगड़ा': काशीनाथ सिंह की संस्मरणात्मक कृति का समीक्षात्मक अध्ययन
Authors
मनु डागुर, डॉ. पिंकी पारीक
Abstract
हिन्दी गद्य साहित्य की संस्मरण विधा के सशक्त हस्ताक्षर काशीनाथ सिंह अपने यथार्थ लेखन एवं कथ्य व शिल्प में अपनी अलग पहचान रखते हैं। काशीनाथ सिंह के संस्मरणों में सृजनात्मक चेतना और सौन्दर्य बोध को जानने के लिए उनके व्यक्तित्व का दिगदर्शन अति आवश्यक है। प्रस्तुत शोध-पत्र उनकी संस्मरणात्मक कृति ‘घर का जोगी जोगड़ा’ के माध्यम से उनके ग्रामीण परिवेश, संघर्षशील जीवन व उनके प्रेरणास्त्रोत बड़े भाई ‘नामवर सिंह’ जो कि हिन्दी आलोचना जगत के मूर्धन्य विद्वान है, के व्यक्तित्व को यथार्थता के साथ हमारे सामने रखता है।
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Pages:34-36
How to cite this article:
मनु डागुर, डॉ. पिंकी पारीक "‘घर का जोगी जोगड़ा': काशीनाथ सिंह की संस्मरणात्मक कृति का समीक्षात्मक अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 34-36
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