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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
प्रतिबद्धता, सम्बद्धता और आबद्धता के कवि बाबा नागार्जुन
Authors
डॉ. अमिय कुमार साहु
Abstract
यह शोधपत्र बाबा नागार्जुन के काव्य में निहित ‘प्रतिबद्धता, संबद्धता और आबद्धता’ की बहुआयामी अवधारणाओं का विश्लेषण करता है। नागार्जुन को ‘जनकवि’ के रूप में स्थापित करने वाले तत्व उनकी जनपक्षधर दृष्टि, सामाजिक यथार्थ से गहरा जुड़ाव और मानवीय संवेदनाओं की व्यापक अभिव्यक्ति हैं। उनकी प्रतिबद्धता बहुजन समाज, सामाजिक न्याय, शोषित-वंचित वर्ग तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित है। संबद्धता के स्तर पर वे समाज, प्रकृति, लोकजीवन, संस्कृति और इतिहास से सक्रिय संवाद स्थापित करते हैं, जिससे उनकी कविता जीवंत और यथार्थपरक बनती है। वहीं आबद्धता उनके पारिवारिक, भावनात्मक और स्मृतिपरक संबंधों की गहराई को व्यक्त करती है, जो मानवीय आत्मीयता का आधार है। इस प्रकार नागार्जुन का काव्य केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति न होकर सामाजिक चेतना, लोक-संवेदना और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज़ बनकर उभरता है।
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Pages:9-12
How to cite this article:
डॉ. अमिय कुमार साहु "प्रतिबद्धता, सम्बद्धता और आबद्धता के कवि बाबा नागार्जुन". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 9-12
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