Logo
International Journal of
Research in Hindi
ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
चन्द्रकांता की कहानियों में कश्मीरः सांस्कृतिक ऐतिहासिक पक्ष
Authors
Birendra Kisku
Abstract
साहित्यकार अपने कृतियों में समसामयिक परिस्थितियों के साथ देश की संस्कृति, लोक जीवन व इतिहास का चित्रण करता है। साहित्यकार की जो अपनी भावभूमि होती है, ज्यादातर जिस अंचल से उसकी संवेदनाएँ व अनुभव जुड़े होते हैं, उस प्रदेश की लोक संस्कृति, लोकाचार को स्थानीय रंगों के साथ प्रस्तुत करता है। इससे साहित्य में विविध प्रदेशों प्रांतों के रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के अनेक आयाम खुलते हैं। साहित्यकार पाठक को विभिन्न अंचलों के लोक रंगों से परिचित भी कराता है और साहित्य को अपनी विविध वर्णी रचनाओं से समृद्ध करता है। 
किसी देश की संस्कृति, सभ्यता, कला साहित्य, इतिहास दर्शन उस देश की धरोहर है, राष्ट्र समृद्धि का धोतक है। इस दृष्टि से हिन्दी के कई साहित्यकारों ने अपने कृतियों में लोक संस्कृति, लोकजीवन, इतिहास, दर्शन एवं पौराणिक संदर्भो को अपने रचनाओं का आधार बनाया। 
चन्द्रकांता भी उन साहित्यकारों में है, जिन्होंने अपने कहानियों उपन्यासों में कश्मीर के लोक संस्कृति, लोक जीवन, कला-साहित्य, इतिहास का मार्मिक अंकन किया। यद्यपि कि कश्मीर के बारे सैलानी दृष्टि से छिटपुट रचनाएँ की गई है। चन्द्रकांता संभवतः पहली कथाकार है जिन्होेंने कश्मीर की लोकजीवन लोकसंस्कृति इतिहास का चित्रण अनुभव कश्मीरी दृष्टि से किया है।

Download
Pages:4-8
How to cite this article:
Birendra Kisku "चन्द्रकांता की कहानियों में कश्मीरः सांस्कृतिक ऐतिहासिक पक्ष". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 4-8
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.