ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
संस्कृति एवं संघर्ष: एक अविभाज्य द्वंद्व
Authors
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M
Abstract
संस्कृति और संघर्ष एक-दूसरे से बहुत करीब से जुड़े हुए हैं और इन्हें पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता। संस्कृति यह तय करती है कि लोग और समाज कैसे सोचते हैं, क्या महत्वपूर्ण मानते हैं, क्या रीति-रिवाज अपनाते हैं, और कैसे जीते हैं। वहीं, संघर्ष तब होता है जब इन मान्यताओं और हितों में टकराव होता है। अलग-अलग संस्कृतियों के बीच के अंतर कई बार गलत समझने, एक-दूसरे को न सहन करने और झगड़े की वजह बनते हैं, जिससे संघर्ष शुरू होता है। लेकिन यही संस्कृति अपने अंदर सहनशीलता, बातचीत और तालमेल बिठाने की क्षमता भी रखती है, जो संघर्ष को सुलझाने में मदद करती है।
इसलिए, संस्कृति और संघर्ष एक ऐसे रिश्ते में हैं जहाँ संस्कृति संघर्ष की वजह भी बन सकती है और उसका हल भी दे सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि समाज और लोग संस्कृति के किस पहलू को चुनते हैं।
Download
Pages:44-45
How to cite this article:
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M "संस्कृति एवं संघर्ष: एक अविभाज्य द्वंद्व". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 44-45
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

