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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
हिंदी पत्रकारिता और पश्चिम बंगालः एक ऐतिहासिक संबंध
Authors
डॉ. पारोमिता दास
Abstract
हिंदी पत्रकारिता के विकास में पश्चिम बंगाल की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक रही है। आधुनिक हिंदी पत्रकारिता की आधारशिला इसी भूभाग पर रखी गई, जहाँ से इसका प्रसार धीरे-धीरे देश के अन्य क्षेत्रों तक पहुँचा। अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में कलकत्ता भारत का प्रमुख राजनीतिक, प्रशासनिक तथा बौद्धिक केंद्र था। इसी काल में नवजागरण, समाज-सुधार आंदोलनों और आधुनिक वैचारिक चेतना का उदय हुआ, जिसने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण का प्रभावी माध्यम बना दिया। सन् 1826 में पं. युगलकिशोर शुक्ल द्वारा कलकत्ता से प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ को हिंदी का प्रथम समाचारपत्र स्वीकार किया जाता है, जिसने हिंदी पत्रकारिता को एक स्पष्ट दिशा प्रदान की। इसके पश्चात राजा राममोहन राय ने पत्रकारिता को केवल समाचार-प्रसारण तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक सुधार और जनचेतना का सशक्त साधन बनाया। उनके पत्रों के माध्यम से प्रेस-स्वतंत्रता, तर्कबुद्धि और आधुनिक दृष्टिकोण को व्यापक समर्थन मिला। आगे चलकर ‘बंगदूत’, ‘सुधावर्षण’ और ‘हिंदी बँगवासी’ जैसे पत्रों ने हिंदी पत्रकारिता को संगठित स्वरूप प्रदान किया और उसके वैचारिक क्षेत्र का विस्तार किया। इस प्रकार पश्चिम बंगाल हिंदी पत्रकारिता की एक प्रयोगभूमि के रूप में उभरा, जहाँ भाषा, साहित्य और राष्ट्रीय चेतना का सार्थक समन्वय दिखाई देता है। हिंदी पत्रकारिता की वैचारिक नींव बंगाल में ही निर्मित हुई, जिसे भारतीय सांस्कृतिक एकता और बहुभाषिक परंपरा का सशक्त प्रतीक माना जा सकता है।
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Pages:15-18
How to cite this article:
डॉ. पारोमिता दास "हिंदी पत्रकारिता और पश्चिम बंगालः एक ऐतिहासिक संबंध". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 15-18
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