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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
जौनसार-बावर क्षेत्र का परिचय सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक सन्दर्भ में
Authors
डॉ. राजपाल सिंह चौहान
Abstract
हिमप्रान्तर की आँचलिक लोक संस्कृति में जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर की अपनी एक अलग पहचान है। यद्यपि भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से जौनसार-बावर को उत्तरांखण्ड गढ़वाल के गढ़वाल मण्डल का भाग माना जाता है, किन्तु बोली-भाषा, रीति रिवाजों, सामाजिक मान्यताओं और साँस्कृतिक, भौगोलिकता के लिए इस क्षेत्र की अलग पहचान है। जौनसार-बावर एक पहाड़ी आदिवासी क्षेत्र है। यहां के लोग स्वयं को पांडवों के वंशज मानते हैं। महाभारतकालीन सभ्यता और संस्कृति की प्रचुरता के साथ ही इस क्षेत्र की साहित्यिक साँस्कृतिक पहचान का पराभाव आरम्भ होता है। यमुना नदी के तट पर बसा जौनसार-बावर एक ऐसा क्षेत्र है, जो जौनपुर, रंवाई, हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति के साथ साम्य स्थापित करता दृष्टिगोचर होता है। जौनसार-बावर की सीमा का निर्धारण करें तो उत्तर में उत्तरकाशी-जनपद का रंवाई व हिमाचल प्रदेश का शिमला क्षेत्र है। दक्षिण में विकासनगर, देहरादून एवं पछवादून क्षेत्र विराजमान है। पूरब में जिला टिहरी गढ़वाल का जौनपुर क्षेत्र तथा पश्चिम में हिमाचल प्रदेश का सिरमौर का क्षेत्र स्थित है। टिहरी गढ़वाल से यमुना नदी और टोंस नदी इसकी सीमा का निर्धारण करती है। इस शोध पत्र में जौनसार बावर के परिचय, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिदृश्य का अध्ययन किया गया है।
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Pages:4-10
How to cite this article:
डॉ. राजपाल सिंह चौहान "जौनसार-बावर क्षेत्र का परिचय सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक सन्दर्भ में". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 4-10
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