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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
हिन्दी साहित्य में औद्योगीकरण और मानवीय संकट के आख्यान (1950-1980)
Authors
प्रभात मिश्रा
Abstract
स्वातंत्र्योत्तर भारत में औद्योगीकरण की प्रक्रिया ने देश के आर्थिक ढाँचे को सुदृढ़ करने का प्रयास किया, किन्तु साहित्य ने इस प्रक्रिया के मानवीय पक्ष को उजागर किया। 1950 से 1980 के दशक तक के हिन्दी साहित्य, विशेषकर उपन्यास और कहानी में, औद्योगीकरण के कारण उत्पन्न सामाजिक विघटन, पारिस्थितिक संकट, शोषण और मानवीय मूल्यों के ह्रास को केन्द्रीय विषय बनाया गया। यह शोधपत्र इसी अवधि में रचे गए साहित्य के माध्यम से औद्योगीकरणजनित मानवीय संकट के विविध आयामों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
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Pages:63-64
How to cite this article:
प्रभात मिश्रा "हिन्दी साहित्य में औद्योगीकरण और मानवीय संकट के आख्यान (1950-1980)". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 63-64
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