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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
बौद्ध धर्म और अंबेडकर का मानवतावाद: समानता और करुणा की दृष्टि से अध्ययन
Authors
Tara Chand Meena, Sachin Meena
Abstract
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म को मानवतावाद, समानता और करुणा की जीवन-दृष्टि के रूप में स्वीकार किया। उनके विचार में बौद्ध धर्म केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मानव-मुक्ति का मार्ग है। अंबेडकर का मानवतावाद इस धारणा पर आधारित था कि समाज में तब तक सच्चा विकास संभव नहीं है जब तक हर व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त न हों। उन्होंने बुद्ध के सिद्धांतों — करुणा, मैत्री, अहिंसा और समता — को आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ा। अंबेडकर का यह दृष्टिकोण जाति, वर्ण और भेदभाव पर आधारित सामाजिक ढाँचों को चुनौती देता है तथा मानव गरिमा की पुनर्स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है। बौद्ध धर्म की नैतिकता को उन्होंने आत्म-सुधार और सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में देखा। इस शोध का उद्देश्य अंबेडकर के बौद्ध मानवतावाद की वैचारिक और सामाजिक प्रासंगिकता का विश्लेषण करना है, जो आज भी एक न्यायपूर्ण, समरस और सह-अस्तित्व वाले समाज की दिशा में प्रेरणा प्रदान करता है।
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Pages:48-49
How to cite this article:
Tara Chand Meena, Sachin Meena "बौद्ध धर्म और अंबेडकर का मानवतावाद: समानता और करुणा की दृष्टि से अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 48-49
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