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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
आज की मातृत्व: एक अद्वितीय संतुलन का सफर
Authors
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M
Abstract
मातृत्व सदियों से "त्याग" और "निस्वार्थ प्रेम" का पर्याय रहा है। लेकिन आज का दौर, आज की माताएं और आज का मातृत्व, पारंपरिक परिभाषाओं से कहीं आगे निकल चुका है। आज की माता सिर्फ एक "मां" ही नहीं, बल्कि एक पेशेवर, एक पत्नी, एक बेटी, एक मित्र और स्वयं एक व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने की कोशिश करती है। यह सफर अब सिर्फ त्याग का नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म और जटिल संतुलन का है। आज का मातृत्व एक ऐसा कैनवास है, जिस पर रंग पारंपरिकता के भी हैं और आधुनिकता के भी। यह सिर्फ बच्चे को जन्म देने और पालने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी यात्रा है जहाँ एक स्त्री स्वयं को लगातार नए रूपों में खोजती और गढ़ती है। इसमें दोषरहित होने का दबाव नहीं, बल्कि अपनी अच्छाइयों और कमियों के साथ खुद को स्वीकार करने की समझ है।आज की मां से यह उम्मीद रखना कि वह "सुपरमॉम" बने, नाइंसाफी है। ज़रूरत इस बात की है कि हम मातृत्व की इस नई परिभाषा को समझें, उनके संघर्षों को सराहें और एक ऐसे सहायक वातावरण का निर्माण करें जहाँ वह एक माँ के साथ-साथ एक व्यक्ति के रूप में भी पनप सके। क्योंकि आज की मातृत्व की सबसे खूबसूरत परिभाषा यही है - "खुद को पूरी तरह से गढ़ते हुए, एक नई पीढ़ी को संवारना।"
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Pages:29-31
How to cite this article:
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M "आज की मातृत्व: एक अद्वितीय संतुलन का सफर". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 29-31
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