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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
कबीर के काव्य में मध्ययुगीन सामाजिक चेतना
Authors
दिनेश किराड़
Abstract
कबीर भारतीय संत-साहित्य की एक अनमोल धरोहर हैं, जिनकी वाणी में आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता की स्पष्ट आवाज भी सुनाई देती है। उन्होंने अपने दोहों और साखियों के जरिए जातिगत ऊँच-नीच, धार्मिक पाखंड, साम्प्रदायिक संकीर्णता और सामाजिक अन्याय पर कड़ा , चित्रण भी है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य यह है कि कबीर के काव्य में मध्यकालीन सामाजिक चेतना किस तरह से प्रकट होती है।
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Pages:25-28
How to cite this article:
दिनेश किराड़ "कबीर के काव्य में मध्ययुगीन सामाजिक चेतना". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 25-28
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