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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
जौनसारी भाषा का संवर्धन व उन्नयनः अनाउणे के सन्दर्भ में
Authors
रीता शर्मा, डॉ० शुभा मटियानी
Abstract
जौनसारी भाषा एवं उसका साहित्य बहुत ही कम मात्रा में उपलब्ध है। इसी दृष्टि से इस भाषा का सम्बर्द्धन एवं संरक्षण आवश्यक है तथा जौनसारी लोकसाहित्य को लिपिबद्ध कर इसे भावी पीढ़ी तक पहुँचाया जा सकता है, क्योंकि पलायन शिक्षा, चिकित्सा एवं रोजगार के कारणों से लोग इस अंचल-विशेष से पृथक हो गये है, और जौनसारी भाषा जन व्यवहार से दूर होती जा रही है, अर्थात इस भाषा का प्रचलन धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। वर्तमान पीढ़ी के लोग अपने बच्चों के साथ क्षेत्रीय भाषा में वार्तालाप करने में असहज महसूस करते है अर्थात जौनसारी भाषा में बातचीत करने में शर्म महसूस करते हैं और अपनी भाषा-बोली को अगली पीढ़ी को हस्तानरित नहीं करते हैं जिसके कारण धीरे-धीरे यह भाषा विलुप्तिकरण की ओर अग्रसर हो रही है । प्रस्तुत शोध पत्र जौनसारी भाषा के संवधर््ान व उन्नयन सन्दर्भ में है जिसमे जौनसार क्षेत्र के महत्वपूर्ण अनाउ.ो का संकलन किया गया है द्य इस शोध में जौनसार के क्षेत्र का अध्ययन किया गया जिसमे स्थानीय लोगों से अनाउ.ो के सन्दर्भ में जानकारी ली गयी द्य जिसमे चार सौ से अधिक अनाउणे का संकलन किया गया इस शोध का उदेश्य जौनसारी भाषा का संबर्धन व संरक्षण करना है ।
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Pages:14-21
How to cite this article:
रीता शर्मा, डॉ० शुभा मटियानी "जौनसारी भाषा का संवर्धन व उन्नयनः अनाउणे के सन्दर्भ में". International Journal of Research in Hindi, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 14-21
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