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VOL. 6, ISSUE 2 (2024)
वैज्ञानिक भाषा के रूप में हिंदी भाषा का स्वरूप
Authors
खुशबू
Abstract
हिंदी भाषा की विकास यात्रा प्राचीन भारतीय आर्य भाषा संस्कृत (वैदिक संस्कृत और लौकिक संस्कृत) से होती हुई मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा (पालि, प्राकृत एवं अपभ्रंश) से विकास की ओर बढ़ते-बढ़ते आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं तक आकर पहुँचती है, जिसमें वर्तमान में 5 उपभाषायें और 18 बोलियाँ शामिल हैं। इन सभी उपभाषाओं एवं बोलियों को हिन्दी के व्यापक अर्थ के रूप में लिया जाता है। आदिकाल में पद्य (दोहा, कवित्त, छप्पय आदि) के रूप विकसित हुई हिंदी भाषा आधुनिक काल में गद्य-पद्य दोनों के रूप में आगे बढ़ते-बढ़ते वर्तमान में विज्ञान, तकनीक, जनसंचार की एक सशक्त भाषा के रूप में हिंदी ने अपना विकास कियाहै। वर्तमान में हिंदी के महत्त्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि हमारे देश में हर वर्ष 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस एवं हर वर्ष 10 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे विष्व हिन्दी दिवस भी कहते हैं। इस दिन को मनाने का मकसद हिन्दी भाषा को वैष्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। आज हिंदी भारत की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित है।
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Pages:20-21
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खुशबू "वैज्ञानिक भाषा के रूप में हिंदी भाषा का स्वरूप". International Journal of Research in Hindi, Vol 6, Issue 2, 2024, Pages 20-21
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