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VOL. 6, ISSUE 2 (2024)
कवि भवानी प्रसाद मिश्र के काव्य में लोकमंगल के तत्व
Authors
प्रणव शर्मा, डॉ. कैलाश शर्मा
Abstract
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने साहित्य लिखने के उद्देश्य को लेकर लोकमंगल की दो अवस्थाओं की चर्चा की है। जिसमें पहली लोकमंगल की सिद्धावस्था और दूसरी लोकमंगल की साधनावस्था है। उन्होंने लोकमंगल की सिद्धावस्था को भोगपक्ष प्रधान बताया है। ऐसी अवस्था में प्रेम, श्रृंगार और सौन्दर्यपूर्ण साहित्य ही लिखे जाते हैं। ऐसा साहित्य केवल मनोरंजन मात्र तक ही सीमित हो जाता है। वहीं लोकमंगल की साधनावस्था में लिखा साहित्य आदर्श की उच्च कोटियों तक पहुँचता है। साधनावस्था में साहित्यकार लोगों के मंगल और कल्याण के पक्ष को मुख्य रखता है। प्रस्तुत शोध पत्र के द्वारा कवि भवानी प्रसाद मिश्र के काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था के तत्वों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:18-19
How to cite this article:
प्रणव शर्मा, डॉ. कैलाश शर्मा "कवि भवानी प्रसाद मिश्र के काव्य में लोकमंगल के तत्व". International Journal of Research in Hindi, Vol 6, Issue 2, 2024, Pages 18-19
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