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VOL. 6, ISSUE 2 (2024)
आधुनिकता के दौर में कुमॉऊनी भाषा का बदलता स्वरूप
Authors
डॉ. शशि पाण्डे
Abstract
जब कोई भाषा समय के अनुरूप समाज की मांगो के अनुसार अपने उत्तरदायित्व का पालन करना चाहती है, तो उस भाषा का विकास होने लगता है, इसे ही आधुनिकीकरण कहते हैं।
अनेक विद्वानों ने प्रारम्भ से ही अपनी भाषा को बचाने का प्रयत्न किया और उसे आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया किन्तु आज उसमें आधुनिकता का प्रभाव प्रचुर मात्रा में देखने को मिलता है परन्तु जो हमारे पूर्वजों की धरोहर है उसे बचाने के लिए अनेको प्रयास किये जा रहे हैं।
कुमॉऊनी भाषा वैसे तो प्रकृति से जुड़ी है उसमें अच्छे काम हो या बुरे सबके लिए अधिकांश जिन शब्दों का प्रयोग मिलता है चाहे वहाँ अप शब्द हो आर्शीवाद हो, आदि में जिन शब्दों का प्रयोग होता है, सभी वाक्य प्रकृति से सम्बन्धित होते हैं। जैसे बकौल फुल ज्याल यह कुमाउनी का अप शब्द है जो से जो प्रकृति का शब्द है बाकल एक जंगली पौधा होता है जो उस घर की छत में लगा होता है, जिसमें कोई नहीं रहता इसी तरह कुमाऊनी में आशीर्वाद के लिए जो शब्द का प्रयोग मिलता है वह इस प्रकार है जैसे
जी रैया जागि रेया
अगास बराबर लम्ब है ज्या
पृथ्वी बराबर चोकाव है ज्या
दुब जस् पउनैरया
यो दिन भेट्न रैया
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Pages:15-17
How to cite this article:
डॉ. शशि पाण्डे "आधुनिकता के दौर में कुमॉऊनी भाषा का बदलता स्वरूप". International Journal of Research in Hindi, Vol 6, Issue 2, 2024, Pages 15-17
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