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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 5, ISSUE 3 (2023)
भारतेन्दु युगीन कवियों में राष्ट्रीय-भाव बोध
Authors
ज्ञानी देवी गुप्ता
Abstract
प्रस्तुत शोध का विषय भारतेन्दु-युगीन प्रमुख कवियों में राष्ट्रीय-भाव बोध है। भारतेन्दु-युग में जन-भाव बोध पुनर्जागरण की भावना से अनुप्रणित थी। अतः इसे पुनर्जागरण युग भी कहा गया। भारतेन्दु-युग आधुनिक-काल का प्रथम चरण है। इस युग में आधुनिकता के प्रवर्तक भारतेन्दु हरिेचन्द्र को माना जाता है। क्योंकि इन्होंने रीतिकाल से चली आ रही शृंगारिक प्रवृति को समाज की तरफ मोड़ा व आम जनता को साहित्य का केन्द्र बनाया। इससे पहले सामान्य वर्ग की तरफ ध्यान न देकर राजा-महाराजाओं की प्रशंसा व सुन्दरियों के नख-शिख का वर्णन किया जाता था तथा आम जनता का साहित्य में कोई स्थान नहीं था। भारतेन्दु युगीन कवियों में राजभक्ति होते हुए भी उन्होंने देशभक्ति का प्रचार जनता में किया व अंग्रेजी शासन की कुप्रवृतियों व जनता के आलस्य को साहित्यिक ढंग से जनता के सामने लाने का प्रयास किया। इस युग में देशभक्ति व सामाजिक भाव बोध को तो कवियों ने बहुत अच्छे ढंग से जनता के सामने पेश किया लेकिन राजभक्ति के मोह को एकदम नहीं छोड़ पाये।
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Pages:12-14
How to cite this article:
ज्ञानी देवी गुप्ता "भारतेन्दु युगीन कवियों में राष्ट्रीय-भाव बोध". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 3, 2023, Pages 12-14
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