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VOL. 5, ISSUE 3 (2023)
आधुनिक कथाकारो के उपन्यासों में नारी चेतना
Authors
रीना मेवाड़ा, तबस्सुम ख़ान
Abstract
मनोवैज्ञानिक अध्ययन की आधार भूत सामग्री फ्रायड के मनोविश्लेषण संबन्धी सिद्धान्त रही है। फ्रॉयड के अनुसार मानव-मन के अन्दर कुछ शक्तियाँ दबी पड़ी है जो मानव के मस्तिष्क में संघर्षशील स्थितियाँ उत्पन्न करती है। मनुष्य के नित्य प्रति के साधारण क्रिया.कलाप के पीछे चेतन मन कार्यरत रहता है । इस चेतन-मन के भीतर भी मनुष्य की अतृप्त, दबी हुई भावनाएँ, वासनाएँ तथा अन्य शक्तियाँ छिपी होती है और निरन्तर संघर्ष करती है उनसे अचेतन मन बनता है। चेतन एवं अचेतन के बीच एक और भाग है, उसकी स्थिति अर्द्धचंतन के रूप में हैं। फ्रॉयड की मान्यता है कि अवचेतन मन में स्थित इच्छाएँ, वासनाएँ तथा भावनाएँ, सामाजिक अथवा अन्य भय से खत्म नहीं हो पाती क्योंकि मनुष्य का चेतन मन उन्हें दबाने की कोशिश करता है। फलस्वरूप ये दमित इच्छाएँ तृप्ति के लिए सक्रिय होने का प्रयत्न करती हैं। फ्रॉयड ने इस मूल शक्ति का आधार व्यक्ति के दमित काम को माना है। सेक्स की मनोग्रंथि व्यक्ति के अन्तर्मन तथा व्यक्तित्व को प्रभावित करती है और साथ-साथ क्रोध, क्लेश, ईर्ष्या, करुणा तथा मालिन्य आदि अनेक मनोविकारों को प्रज्वलित करती है। काम-वासना के दबने से व्यक्ति के मन में अनेक कुण्ठाएँ उत्पन्न होती है जो व्यक्ति के विकास में बाधाएँ खड़ी करती हैं। फ्रॉयड की यह भी मान्यता है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक काम प्रवृत्ति ही मानव.मन का संचालन करती है। फ्रॉयड ने इसे लिबिडोश् कहा है। लिबिड़ोश ऐसी काम.शक्ति है जिसका सम्बन्ध फ्रॉयड ने आत्म-प्रेम, रति प्रेम, माँ-बाप का प्रेम, बच्चों का प्रेम, मंत्री, स्वाभाविक आकर्षण, ममता, सहानुभूति एवं अमूर्त, वस्तुओं के प्रति श्रद्धा आदि बातों से जोड़ा है। यह काम शक्ति अहम, इद्म, अति अहम की अवस्थाओं में कार्यरत रहती है।
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Pages:8-11
How to cite this article:
रीना मेवाड़ा, तबस्सुम ख़ान "आधुनिक कथाकारो के उपन्यासों में नारी चेतना". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 3, 2023, Pages 8-11
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