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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
कमल किशोर गोयनका की आलोचना दृष्टि में भारतीयता
Authors
देवकांत सिंह
Abstract
प्रेमचंद हिंदी गद्य साहित्य में एक ऐसे रचनाकार के रूप में जाने जाते है, जिनका नाम सिर्फ देश ही नहीं विदेशों में भी उसी सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी व्यापक रचनाशीलता ने देश, विदेश के पाठ्यक्रम में अपना स्थान बनाया है। प्रेमचंद की ख्याति कथा-सम्राट के रूप में की जाती है लेकिन चर्चायें कुछ कहानी तथा कुछ उपन्यासों तक ही सीमित रही है। इसी समस्या को निर्धारित कर कमल किशोर गोयनका प्रेमचंद के शोधकार्य और आलोचना में संलग्न हुए जो निरंतर आज 55 वर्षों से प्रेमचंद को सम्पूर्णता में प्रदर्शित करने के कार्य में लगे हुए है। कमल किशोर गोयनका पहले ऐसे आलोचक है जिन्होंने प्रेमचंद के साहित्य की आलोचना भारतीयता के आधार पर की है। इस आलेख में कमल किशोर गोयनका के आलोचना दृष्टि का मूल्यांकन किया गया है।
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Pages:23-25
How to cite this article:
देवकांत सिंह "कमल किशोर गोयनका की आलोचना दृष्टि में भारतीयता". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 23-25
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