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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
रामनरेश पाठक के नवगीत में लोकतत्व
Authors
शशांकधर शेखर, डॉ आनंद कुमार सिंह
Abstract
कविवर राम नरेश पाठक के नवगीतों में लोक मुखरता से सामने आया है, इनके नवगीत आमजन के दुःख दर्द पीड़ा व प्रेम के आदिम राग से संश्लेषित है। वे मूलतः गाँव में पले बढे ग्रामीण माहौल कृषक संस्कृति जिसमें परस्पर साहचर्य का भाव होता है एक दुसरे के सुख दुःख में शामिल होने का भाव होता है। इनके नवगीतों में वह ग्राम्य संस्कृति रची बसी दिखाई देती है। नवगीत कोई एकदम से नई विधा नहीं है श्रमिक संस्कृति में गीत मानवों के सुख दुःख के साथी रहे हैं। हमारे यहाँ रोपनी, जंतसर, कटनी, तीज, जितिया, सोहर छठ सबकी परम्पराएँ रहीं हैं और सबके अलग अलग गीत रहें हैं। नवगीत का बीज लोक में मौजूद इन्ही कृषक श्रमिक समाज के दुःख दर्द के गीत की भूमि में पड़ा वही से अंकुरित, पुष्पित, पल्लवित हुआ और आकर ग्रहण किया। इस शोध आलेख में हम कवि के नवगीतों में व्याप्त ग्राम्य संस्कृति एवं लोकतत्वों की पड़ताल करेंगे।
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Pages:9-11
How to cite this article:
शशांकधर शेखर, डॉ आनंद कुमार सिंह "रामनरेश पाठक के नवगीत में लोकतत्व". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 9-11
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