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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
अभिनव प्रेम का आख्यानः तीसरी कसम उर्फ मरे गये गुल्फाम
Authors
डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
Abstract
हिन्दी कथा साहित्य के विकास में फणीश्वर नाथ रेणु का विशेष योगदान है। प्रेमचन्द और जैनेन्द्र के बाद हिन्दी कथा साहित्य को नया आयाम देने वालों में रेणु का नाम अग्रणी है। रेणु हिन्दी साहित्य के ऐसे कथाकारों में से हैं, जिनकी किस्सागोई का कोई जबाब नहीं है। कहानी कहने और संवेदन को जीवंत और सरस बनाने की कला में आप माहिर हैं। जीवन के समस्त राग-रंग को समग्रता में जीने और उसे अपने लेखन द्वारा जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के कारण रेणु का कथा साहित्य में अत्यंत लोकप्रिय हैं। रेणु हिन्दी साहित्य के उन कथाकारों में से हैं,जिनके कथा साहित्य में लोक और लोक जीवन के प्रति गहरी संवेदना देखने को मिलती है। यद्यपि रेणु को आंचलिक कथाकार के रूप में ज्यादा मान्यता मिली है, लेकिन उनके साहित्य को व्यापक स्तर पर स्वीकृति मिली है। ऐसा प्रतीत होता है कि जीवन के सूक्ष्म रंगों को रेणु ने बचपन से ही अपने भीतर संचित करना आरम्भ कर दिया था, जिसकी रंग-विरंगी छटाएं उनके कथा साहित्य में यत्र-तत्र बिखरी हुईं हैं। किसी भी लेखक के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण होता है कि वह उस समाज को कितनी सजगता से जानता और समझता है, जिसमें वह जी रहा है, उसके निजी अनुभव और उसकी कल्पना और सर्वश्रेठ मिश्रण ही एक मुकम्मल और प्रभावी साहित्य के सृजन में सहायक होता है। 
रेणु हिन्दी कथा साहित्य के उस परम्परा के कथाकार हैं, जिन्होंने लोक के विविध रंगों को उसकी अंतिम सीमा तक गहकर एक नए सरोकार को निभाने का महनीय कार्य किया। रेणु ने ग्राम्यांचल को बहुत शिद्दत से देखा और भोग था । अंचल के कुशल चितेरे की तरह बोली/बानी /गीत/संगीत और लोक कलाओं को आपने बड़े ही सहज रूप में प्रस्तुत किया ।आपकी इसी विशेषता के कारण आप आंचलिक कथाकार के रूप में प्रसिद्द हैं।

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Pages:6-8
How to cite this article:
डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव "अभिनव प्रेम का आख्यानः तीसरी कसम उर्फ मरे गये गुल्फाम". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 6-8
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