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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
हिन्दी रंगमंच की विकास यात्रा
Authors
उषा
Abstract
हिन्दी साहित्य में रंगमंच का अपना एक अलग ही इतिहास है। जिसे बिन नाटक के नहीं समझा जा सकता अर्थात् नाटक और रंगमंच साथ-साथ विकसित हुए है। यह एक-दूसरे से अन्योन्याश्रित संबंध रखते हैं जहाँ अन्य साहित्यिक विधाएं अपने आप में पूर्ण होती है वहीं नाटक की पूर्णता रंगमंच पर जाकर ही होती है। पूरे भारतीय नाटकों और रंगमंच के इतिहास को हम तीन भागों में बांट कर देख सकते हैं प्राचीन, मध्य और आधुनिक।
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Pages:4-5
How to cite this article:
उषा "हिन्दी रंगमंच की विकास यात्रा". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 4-5
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