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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
मधुकर गौड़ का गीत काव्य
Authors
डॉ. उमेश चन्द्र शुक्ल
Abstract
समकालीन गीतकार मधुकर गौड़ के गीतों की तरलता जीवन के गझिन संवेदना से जमीनी धरातल पर जोड़ती है। गीतकार का भाव बिम्ब भावक के चारो तरफ एक विशेष तरह की खुशबू विस्तरित करता है। जीवन की केन्द्रीय लय तो जन्म से ही गीतकार मधुकर के श्वास-प्रश्वास में व्याप्त है। जैसे-जैसे जीवन के सौन्दर्यमूल्य विकसित हुए मन तरंगायित होने लगा काव्य की सरिता मनोजगत में छलछ्लाने लगी, स्मृतियों के आईने में उतरती हुई रचनाधर्मिता, अनुभवों की थाती को आम आदमी तक ले जाने में सफल हुए है। किसी तरह की धार्मिक सामाजिक संकीर्णता से मुक्त रहते हुए गीतकार डेमोक्रेट की भूमिका में सुकून महसूस करता है। करो या मरो तथा अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसे स्वतंत्र भारत की संकल्पना के दौर में जन्में मधुकर जी की रगों में मुक्ति की धारा प्रवाहित है।
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Pages:1-3
How to cite this article:
डॉ. उमेश चन्द्र शुक्ल "मधुकर गौड़ का गीत काव्य". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 1-3
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