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VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
संसार एक गहरा सागर’ में समसामयिकता
Authors
डॉ. राजेन्द्र सिंह
Abstract
एक सजग, संवेदनषील साहित्यकार अपने परिवेषगत, तथ्यों, कथ्यों और सत्यों को अपनी रचना का वर्ण्य-विषय बनाता है। वह कुषल षिल्पी एवं रचनाधर्मी भी है जो युगीन परिवेष को विभिन्न पत्रों, घटनाओं और परिस्थितियों के माध्यम से सूत्रबद्ध कर पाठक वर्ग के समक्ष, विषय-वस्तु प्रस्तुत करके न केवल अपने प्रयोजन की सिद्धि करता है अपितु समाज की दिषा और दषा भी निर्धारित करने का सार्थक प्रयास करता है। इस प्रकार ‘‘संसार एक गहरा सागर’’ समकालीन परिवेष का संजीवांकन तो करता ही है, साथ ही मानव मनोवृत्तियों का चित्रण कर पारिवारिक-सामाजिक सम्बन्धों की षिथिलता और भौतिक प्रतिस्पर्धा का जीवन्त चित्रण करते हुए परिवेषगत विसंगतियों और विषमताओं का यथार्थांकन भी करता है।
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Pages:19-21
How to cite this article:
डॉ. राजेन्द्र सिंह "संसार एक गहरा सागर’ में समसामयिकता". International Journal of Research in Hindi, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 19-21
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