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VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
सूरदास के काव्य में भक्ति और प्रेम का स्वरूप: आध्यात्मिकता और मानवीय भावनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
सीमा कुमारी मीणा
Abstract
सूरदास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के प्रमुख कवि हैं, जिनके काव्य में भक्ति और प्रेम का अद्भुत एवं गहन समन्वय देखने को मिलता है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य सूरदास के काव्य में निहित भक्ति और प्रेम के स्वरूप का विश्लेषण करना है तथा यह समझना है कि उनके काव्य में आध्यात्मिक अनुभूति और मानवीय भावनाएँ किस प्रकार एक-दूसरे से संबद्ध हैं। सूरदास के काव्य में भक्ति मुख्यतः सगुण भक्ति के रूप में व्यक्त होती है, जिसमें भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण का भाव प्रमुख है। उनके काव्य में भक्त और भगवान का संबंध अत्यंत आत्मीय, संवेदनशील और भावप्रधान रूप में चित्रित हुआ है। यह भक्ति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय संबंधों की सहजता और निकटता भी परिलक्षित होती है।
सूरदास ने अपने काव्य में प्रेम को विभिन्न रूपों—वात्सल्य, सख्य और माधुर्य—में प्रस्तुत किया है। यशोदा और कृष्ण के संबंध में मातृत्व प्रेम का अत्यंत मार्मिक चित्रण मिलता है, जबकि गोपियों के माध्यम से माधुर्य भाव की अभिव्यक्ति होती है। इस प्रकार उनके काव्य में प्रेम लौकिक और अलौकिक दोनों स्तरों पर व्यक्त होता है, जो भक्ति को और अधिक सजीव और प्रभावशाली बनाता है। सूरदास का काव्य भक्ति और प्रेम के समन्वित स्वरूप का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें आध्यात्मिकता और मानवीय संवेदनाओं का संतुलित और प्रभावी चित्रण मिलता है।
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Pages:27-30
How to cite this article:
सीमा कुमारी मीणा "सूरदास के काव्य में भक्ति और प्रेम का स्वरूप: आध्यात्मिकता और मानवीय भावनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 27-30
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